Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.46.15: वह हृदय देश में स्थित अंगुष्ठमात्र जीवात्मा सूक्ष्म (वहाँ अन्तरतम रूप में स्थित) शरीर के साथ सम्बन्ध रखने के कारण सदैव जन्म-मरण में रहता है। मूर्ख प्राणी सबके अधिष्ठाता, स्तुति के पात्र, सर्वशक्तिमान, सबके आदि कारण और सर्वव्यापी परमेश्वर को देखने में असमर्थ हैं; परन्तु योगीजन उस सनातन परमेश्वर का साक्षात्कार करते हैं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 5.46: परमात्माके स्वरूपका वर्णन और योगीजनोंके द्वारा उनके साक्षात्कारका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 46: परमात्माके स्वरूपका वर्णन और योगीजनोंके द्वारा उनके साक्षात्कारका प्रतिपादन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.46.15 
अङ्गुष्ठमात्र: पुरुषोऽन्तरात्मा
लिङ्गस्य योगेन स याति नित्यम्।
तमीशमीडॺमनुकल्पमाद्यं .
पश्यन्ति मूढा न विराजमानम्।
योगिनस्तं प्रपश्यन्ति भगवन्तं सनातनम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वह हृदय देश में स्थित अंगुष्ठमात्र जीवात्मा सूक्ष्म (वहाँ अन्तरतम रूप में स्थित) शरीर के साथ सम्बन्ध रखने के कारण सदैव जन्म-मरण में रहता है। मूर्ख प्राणी सबके अधिष्ठाता, स्तुति के पात्र, सर्वशक्तिमान, सबके आदि कारण और सर्वव्यापी परमेश्वर को देखने में असमर्थ हैं; परन्तु योगीजन उस सनातन परमेश्वर का साक्षात्कार करते हैं॥15॥
 
That mere thumb located in the heart country, the living soul always undergoes birth and death due to the relationship with the subtle (located there in the innermost form) body. Foolish creatures are unable to see the ruler of all, the worthy of praise, the all-powerful, the original cause of all and the omnipresent God; But yogis interview that eternal God. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)