Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.45.19: राजन! केवल पुण्य कर्मों (निष्काम भाव से किए गए) से ही सत्यस्वरूप ब्रह्म को नहीं जीता जा सकता। न ही किए गए हवन या यज्ञ से भी अज्ञानी मनुष्य अमरता और मोक्ष को प्राप्त नहीं कर सकता और न ही उसे परलोक में शांति मिलती है। 19॥   |   mahabharat अध्याय 5.45: गुण-दोषोंके लक्षणोंका वर्णन और ब्रह्मविद्याका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 45: गुण-दोषोंके लक्षणोंका वर्णन और ब्रह्मविद्याका प्रतिपादन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.45.19 
न कर्मणा सुकृतेनैव राजन्
सत्यं जयेज्जुहुयाद् वा यजेद् वा।
नैतेन बालोऽमृत्युमभ्येति राजन्
रतिं चासौ न लभत्यन्तकाले॥ १९॥
 
 
अनुवाद
राजन! केवल पुण्य कर्मों (निष्काम भाव से किए गए) से ही सत्यस्वरूप ब्रह्म को नहीं जीता जा सकता। न ही किए गए हवन या यज्ञ से भी अज्ञानी मनुष्य अमरता और मोक्ष को प्राप्त नहीं कर सकता और न ही उसे परलोक में शांति मिलती है। 19॥
 
Rajan! Brahma, the true form, cannot be conquered by mere virtuous deeds (done without selflessness). Or even through the Havan or Yagya that is performed, an ignorant person cannot attain immortality and salvation and he also does not get peace in the afterlife. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)