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mahabharat 5.45.14: जो धनवान गृहस्थ इस प्रकार सदाचारी, त्यागी और सात्त्विक है, वह अपनी पाँचों इन्द्रियों से पाँचों विषयों को हटा देता है ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 5.45: गुण-दोषोंके लक्षणोंका वर्णन और ब्रह्मविद्याका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 45: गुण-दोषोंके लक्षणोंका वर्णन और ब्रह्मविद्याका प्रतिपादन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.45.14 
द्रव्यवान् गुणवानेवं त्यागी भवति सात्त्विक:।
पञ्च भूतानि पञ्चभ्यो निवर्तयति तादृश:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो धनवान गृहस्थ इस प्रकार सदाचारी, त्यागी और सात्त्विक है, वह अपनी पाँचों इन्द्रियों से पाँचों विषयों को हटा देता है ॥14॥
 
The wealthy householder who is thus virtuous, renunciant and Sattvik, removes the five objects from his five senses. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)