Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.44.9: जो आचार्य सत्य का प्रकाश करके ब्राह्मण जाति की रक्षा करते हैं और परमार्थ तत्त्व के उपदेश द्वारा अमरता प्रदान करते हैं, उन्हें पिता और माता के समान समझना चाहिए और उनके द्वारा किए गए उपकारों को स्मरण करके उनसे कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए॥9॥ | mahabharat अध्याय 5.44: ब्रह्मचर्य तथा ब्रह्मका निरूपण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
य: प्रावृणोत्यवितथेन वर्णा-
नृतं कुर्वन्नमृतं सम्प्रयच्छन्।
तं मन्येत पितरं मातरं च
तस्मै न द्रुह्येत् कृतमस्य जानन्॥ ९॥
अनुवाद
जो आचार्य सत्य का प्रकाश करके ब्राह्मण जाति की रक्षा करते हैं और परमार्थ तत्त्व के उपदेश द्वारा अमरता प्रदान करते हैं, उन्हें पिता और माता के समान समझना चाहिए और उनके द्वारा किए गए उपकारों को स्मरण करके उनसे कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए॥9॥
Those Acharyas who protect the Brahmin castes by revealing the truth and providing immortality through the teachings of Paramartha Tattva, should be considered as father and mother and one should never be jealous of them after remembering the favors done by them. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥