Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.44.3: धृतराष्ट्र बोले, "यदि आप कह रहे हैं कि यह शाश्वत ज्ञान, जो अनंत ब्रह्म से संबंधित है, जो कर्मों द्वारा आरंभ नहीं किया जा सकता तथा जो कर्म के समय भी आत्मा में रहता है, केवल ब्रह्मचर्य से ही प्राप्त हो सकता है, तो फिर मेरे जैसा व्यक्ति ब्रह्म से संबंधित अमरता (मोक्ष) कैसे प्राप्त कर सकता है?" | mahabharat अध्याय 5.44: ब्रह्मचर्य तथा ब्रह्मका निरूपण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र बोले, "यदि आप कह रहे हैं कि यह शाश्वत ज्ञान, जो अनंत ब्रह्म से संबंधित है, जो कर्मों द्वारा आरंभ नहीं किया जा सकता तथा जो कर्म के समय भी आत्मा में रहता है, केवल ब्रह्मचर्य से ही प्राप्त हो सकता है, तो फिर मेरे जैसा व्यक्ति ब्रह्म से संबंधित अमरता (मोक्ष) कैसे प्राप्त कर सकता है?"
Dhritarashtra said, "If you are saying that this eternal knowledge, which is related to the infinite Brahma, which cannot be started by actions and which remains in the soul even at the time of action, can be obtained only through celibacy, then how can a person like me get immortality (salvation) related to Brahma?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥