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mahabharat 5.44.28: राजन! वह ऋग्वेद की ऋचाओं में, यजुर्वेद के मन्त्रों में, अथर्ववेद की ऋचाओं में तथा शुद्ध सामवेद में भी दृष्टिगोचर नहीं होता। वह रथन्तर और बार्हद्रथ के समीप तथा महाव्रत में भी दृष्टिगोचर नहीं होता; क्योंकि वह ब्रह्म सनातन है। 28॥   |   mahabharat अध्याय 5.44: ब्रह्मचर्य तथा ब्रह्मका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 44: ब्रह्मचर्य तथा ब्रह्मका निरूपण  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.44.28 
नैवर्क्षु तन्न यजुष्षु नाप्यथर्वसु
न दृश्यते वै विमलेषु सामसु।
रथन्तरे बार्हद्रथे वापि राजन्
महाव्रते नैव दृश्येद् ध्रुवं तत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
राजन! वह ऋग्वेद की ऋचाओं में, यजुर्वेद के मन्त्रों में, अथर्ववेद की ऋचाओं में तथा शुद्ध सामवेद में भी दृष्टिगोचर नहीं होता। वह रथन्तर और बार्हद्रथ के समीप तथा महाव्रत में भी दृष्टिगोचर नहीं होता; क्योंकि वह ब्रह्म सनातन है। 28॥
 
Rajan! It is not visible in the verses of Rigveda, in the mantras of Yajurveda, in the hymns of Atharvaveda and even in pure Samaveda. He is not seen in the presence of Rathantara and Barhadratha and even during the great fast; Because that Brahma is eternal. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)