Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.44.13: जिस प्रकार एक शिष्य अपने गुरु के प्रति श्रद्धा और आदर का व्यवहार करता है, उसी प्रकार उसे अपने गुरु की पत्नी और पुत्र के प्रति भी वैसा ही आदर का व्यवहार करना चाहिए। इसे ब्रह्मचर्य का दूसरा चरण भी कहा जाता है। | mahabharat अध्याय 5.44: ब्रह्मचर्य तथा ब्रह्मका निरूपण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समा गुरौ यथा वृत्तिर्गुरुपत्न्यां तथाऽऽचरेत्।
तत्पुत्रे च तथा कुर्वन् द्वितीय: पाद उच्यते॥ १३॥
अनुवाद
जिस प्रकार एक शिष्य अपने गुरु के प्रति श्रद्धा और आदर का व्यवहार करता है, उसी प्रकार उसे अपने गुरु की पत्नी और पुत्र के प्रति भी वैसा ही आदर का व्यवहार करना चाहिए। इसे ब्रह्मचर्य का दूसरा चरण भी कहा जाता है।
The way a disciple treats his Guru with devotion and respect, he should also treat his Guru's wife and son with the same respect. This is also called the second step of Brahmacharya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥