Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.43.47: परन्तु जब तक संकल्प पूरा न हो जाए, तब तक दीक्षित व्रत अर्थात् यज्ञ अनुष्ठान करते रहना चाहिए। यह दीक्षित नाम 'दीक्षा व्रतदेशे' इसी धातु से बना है। सत्पुरुषों का सच्चा स्वरूप भगवान ही सबसे महान है। 47॥ | mahabharat अध्याय 5.43: ब्रह्मज्ञानमें उपयोगी मौन, तप, त्याग, अप्रमाद एवं दम आदिके लक्षण तथा मदादि दोषोंका निरूपण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परन्तु जब तक संकल्प पूरा न हो जाए, तब तक दीक्षित व्रत अर्थात् यज्ञ अनुष्ठान करते रहना चाहिए। यह दीक्षित नाम 'दीक्षा व्रतदेशे' इसी धातु से बना है। सत्पुरुषों का सच्चा स्वरूप भगवान ही सबसे महान है। 47॥
But until the resolution is fulfilled, one should continue to observe the Dixit Vrat i.e. performing Yagya rituals. This Dixit name ‘Diksha Vratadeshe’ is made from this metal. God, the true form of good men, is the greatest. 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥