श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 43: ब्रह्मज्ञानमें उपयोगी मौन, तप, त्याग, अप्रमाद एवं दम आदिके लक्षण तथा मदादि दोषोंका निरूपण  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.43.41 
धृतराष्ट्र उवाच
आख्यानपञ्चमैर्वेदैर्भूयिष्ठं कथ्यते जन:।
तथा चान्ये चतुर्वेदास्त्रिवेदाश्च तथा परे॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "ऋषिवर! समस्त वेदों में, जिनमें इतिहास-पुराण पाँचवाँ है, कुछ लोगों के विशेष नाम हैं (अर्थात् उन्हें पंचवेदी कहते हैं), अन्य लोगों को चतुर्वेदी और त्रिवेदी कहते हैं ॥ 41॥
 
Dhritarashtra said, "Sage! In all the Vedas, of which the Itihas-Purana is the fifth, some people are specifically named (i.e. they are called Panchvedi), others are called Chaturvedi and Trivedi. ॥ 41॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas