Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.43.32: यदि कोई अप्रिय घटना घट जाए, तो कभी दुःख न हो (यह चौथा त्याग है) स्त्री, पुत्र आदि इच्छित वस्तुओं की कभी भी याचना न करे (यह पाँचवाँ त्याग है)॥32॥ | mahabharat अध्याय 5.43: ब्रह्मज्ञानमें उपयोगी मौन, तप, त्याग, अप्रमाद एवं दम आदिके लक्षण तथा मदादि दोषोंका निरूपण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अप्रिये च समुत्पन्ने व्यथां जातु न गच्छति।
इष्टान् पुत्रांश्च दारांश्च न याचेत कदाचन॥ ३२॥
अनुवाद
यदि कोई अप्रिय घटना घट जाए, तो कभी दुःख न हो (यह चौथा त्याग है) स्त्री, पुत्र आदि इच्छित वस्तुओं की कभी भी याचना न करे (यह पाँचवाँ त्याग है)॥32॥
If any unpleasant event occurs, one should never feel pain (this is the fourth renunciation). One should never beg for the things he desires - wife, children etc. (this is the fifth renunciation).॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥