Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.43.28-29: राजेन्द्र! उत्तम त्याग के छह प्रकार बताए गए हैं। धन पाकर प्रसन्न न होना प्रथम त्याग है; यज्ञ, होम आदि में धन व्यय करना तथा कुएँ, तालाब और बगीचे बनवाना द्वितीय त्याग है और सदा वैराग्य से युक्त रहकर काम-वासना का त्याग करना तृतीय त्याग कहा गया है। महर्षि इसे मोक्ष का अनिर्वचनीय मार्ग कहते हैं। अतः इस तृतीय त्याग को विशेष पुण्य माना गया है॥28-29॥   |   mahabharat अध्याय 5.43: ब्रह्मज्ञानमें उपयोगी मौन, तप, त्याग, अप्रमाद एवं दम आदिके लक्षण तथा मदादि दोषोंका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 43: ब्रह्मज्ञानमें उपयोगी मौन, तप, त्याग, अप्रमाद एवं दम आदिके लक्षण तथा मदादि दोषोंका निरूपण  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  5.43.28-29 
श्रेयांस्तु षड्‍‍विधस्त्याग: श्रियं प्राप्य न हृष्यति।
इष्टापूर्ते द्वितीयं स्यान्नित्यवैराग्ययोगत:॥ २८॥
कामत्यागश्च राजेन्द्र स तृतीय इति स्मृत:।
अप्यवाच्यं वदन्त्येतं स तृतीयो गुण: स्मृत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! उत्तम त्याग के छह प्रकार बताए गए हैं। धन पाकर प्रसन्न न होना प्रथम त्याग है; यज्ञ, होम आदि में धन व्यय करना तथा कुएँ, तालाब और बगीचे बनवाना द्वितीय त्याग है और सदा वैराग्य से युक्त रहकर काम-वासना का त्याग करना तृतीय त्याग कहा गया है। महर्षि इसे मोक्ष का अनिर्वचनीय मार्ग कहते हैं। अतः इस तृतीय त्याग को विशेष पुण्य माना गया है॥28-29॥
 
Rajendra! The six types of the best renunciation are explained. Not being happy on getting wealth is the first renunciation; spending money on yajnas, homas, etc. and building wells, ponds and gardens is the second renunciation and renouncing sex while always being filled with detachment is called the third renunciation. Maharishis call it the indescribable way to salvation. Hence, this third renunciation is considered a special virtue.॥28-29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)