Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.43.22: अमृत इन तीन गुणों में निवास करता है - बल, त्याग और निर्दोषता। जो ज्ञानी (बुद्धिमान) ब्राह्मण हैं, वे कहते हैं कि इन गुणों का मुख ईश्वर के सच्चे स्वरूप की ओर है (अर्थात् ये ईश्वर प्राप्ति के साधन हैं)। | mahabharat अध्याय 5.43: ब्रह्मज्ञानमें उपयोगी मौन, तप, त्याग, अप्रमाद एवं दम आदिके लक्षण तथा मदादि दोषोंका निरूपण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दमस्त्यागोऽप्रमादश्च एतेष्वमृतमाहितम्।
तानि सत्यमुखान्याहुर्ब्राह्मणा ये मनीषिण:॥ २२॥
अनुवाद
अमृत इन तीन गुणों में निवास करता है - बल, त्याग और निर्दोषता। जो ज्ञानी (बुद्धिमान) ब्राह्मण हैं, वे कहते हैं कि इन गुणों का मुख ईश्वर के सच्चे स्वरूप की ओर है (अर्थात् ये ईश्वर प्राप्ति के साधन हैं)।
Amrit resides in these three qualities – strength, sacrifice and innocence. Those who are wise (intelligent) Brahmins say that the face of these qualities is towards the true form of God (that is, they are the means to attain God).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥