Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.42.8: मनुष्य (क्रोध, प्रमाद और लोभ के कारण) अहंकार के वशीभूत होकर इस संसार से विदा होने के पश्चात् बार-बार जन्म-मरण के चक्र में फँसते हैं। मृत्यु के पश्चात् उनका मन, इन्द्रियाँ और आत्मा भी उनके साथ चले जाते हैं। शरीर से प्राणों के वियोग के कारण मृत्यु को 'मरण' कहते हैं। 8॥ | mahabharat अध्याय 5.42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य (क्रोध, प्रमाद और लोभ के कारण) अहंकार के वशीभूत होकर इस संसार से विदा होने के पश्चात् बार-बार जन्म-मरण के चक्र में फँसते हैं। मृत्यु के पश्चात् उनका मन, इन्द्रियाँ और आत्मा भी उनके साथ चले जाते हैं। शरीर से प्राणों के वियोग के कारण मृत्यु को 'मरण' कहते हैं। 8॥
Human beings (by anger, carelessness and greed) get influenced by ego and after leaving this world they fall into the cycle of birth and death again and again. After death, their mind, senses and soul also go with them. Due to separation of vital organs from the body, death is termed as 'Maran'. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥