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mahabharat 5.42.46: यहाँ ऋषिगण उस दिव्य ज्ञानदेवी की प्राप्ति के विविध मार्ग बतलाते हैं, जो आसक्ति उत्पन्न नहीं करते और जिनकी प्राप्ति कठिन है। उनके नाम हैं सत्य, सरलता, शील, संयम, शौच और ज्ञान॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 5.42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.42.46 
द्वाराणि तस्येह वदन्ति सन्तो
बहुप्रकाराणि दुराधराणि।
सत्यार्जवे ह्रीर्दमशौचविद्या
यथा न मोहप्रतिबोधनानि॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
यहाँ ऋषिगण उस दिव्य ज्ञानदेवी की प्राप्ति के विविध मार्ग बतलाते हैं, जो आसक्ति उत्पन्न नहीं करते और जिनकी प्राप्ति कठिन है। उनके नाम हैं सत्य, सरलता, शील, संयम, शौच और ज्ञान॥ 46॥
 
Here the saints tell us about the various ways of attaining that divine goddess of knowledge, which do not arouse attachment and which are difficult to attain. Their names are truth, simplicity, modesty, self-control, cleanliness and knowledge.॥ 46॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सनत्सुजातपर्वणि द्विचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सनत्सुजातपर्वमें बयालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)