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mahabharat 5.42.36: अतः जो क्षत्रिय उपर्युक्त रीति से अपना जीवन व्यतीत करता है, वह भी ब्रह्मस्वरूप का अनुभव करता है और ब्रह्म को प्राप्त होता है ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 5.42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.42.36 
तस्माद्धि क्षत्रियस्यापि ब्रह्मावसति पश्यति॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
अतः जो क्षत्रिय उपर्युक्त रीति से अपना जीवन व्यतीत करता है, वह भी ब्रह्मस्वरूप का अनुभव करता है और ब्रह्म को प्राप्त होता है ॥36॥
 
Therefore, a Kshatriya who lives his life in the above manner also experiences the form of Brahma and attains Brahma. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)