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नित्यमज्ञातचर्या मे इति मन्येत ब्राह्मण:।
ज्ञातीनां तु वसन् मध्ये तं विदुर्ब्राह्मणं बुधा:॥ ३४॥
अनुवाद
विद्वान् पुरुष उन्हीं ब्राह्मणों को अपना मानते हैं जो कुटुम्बियों के बीच रहते हुए भी अपनी साधना को उनसे सदैव गुप्त रखने का प्रयत्न करते हैं ॥34॥
Learned men consider only those Brahmins who, despite living among family members, always try to keep their spiritual practice a secret from them. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥