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mahabharat 5.42.31: परंतु जहाँ भय और विपत्ति हो, यदि कोई अपनी महानता प्रकट न करे, वहाँ जो स्थित रहता है और अपने विशेष गुणों को प्रकट नहीं करता, वही श्रेष्ठ पुरुष है; उसके अतिरिक्त कोई नहीं है ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 5.42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.42.31 
यत्राकथयमानस्य प्रयच्छत्यशिवं भयम्।
अतिरिक्तमिवाकुर्वन् स श्रेयान् नेतरो जन:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
परंतु जहाँ भय और विपत्ति हो, यदि कोई अपनी महानता प्रकट न करे, वहाँ जो स्थित रहता है और अपने विशेष गुणों को प्रकट नहीं करता, वही श्रेष्ठ पुरुष है; उसके अतिरिक्त कोई नहीं है ॥31॥
 
But where there is fear and misfortune if one does not reveal his greatness, he who stays there and does not reveal his special qualities is the best man; there is no other. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)