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mahabharat 5.42.3: सनत्सुजात बोले, "हे राजन! इस विषय में दो मत हैं। मृत्यु है और ब्रह्मचर्य से वह दूर हो जाती है - यह एक मत है और मृत्यु है ही नहीं - यह दूसरा मत है। किन्तु मैं जो सत्य है, वही तुमसे कह रहा हूँ। सुनो और मेरे कथन पर संदेह मत करो।"   |   mahabharat अध्याय 5.42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.42.3 
सनत्सुजात उवाच
अमृत्यु: कर्मणा केचिन्मृत्युर्नास्तीति चापरे।
शृणु मे ब्रुवतो राजन् यथैतन्मा विशङ्किथा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सनत्सुजात बोले, "हे राजन! इस विषय में दो मत हैं। मृत्यु है और ब्रह्मचर्य से वह दूर हो जाती है - यह एक मत है और मृत्यु है ही नहीं - यह दूसरा मत है। किन्तु मैं जो सत्य है, वही तुमसे कह रहा हूँ। सुनो और मेरे कथन पर संदेह मत करो।"
 
Sanatsujata said, "O King! There are two views on this matter. Death exists and it is removed by celibacy - this is one view and death does not exist at all - this is the other view. But I am telling you the truth as it is. Listen and do not doubt my statement."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)