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mahabharat 5.42.28: जो लोग धर्म का पालन करने में प्रतिस्पर्धा करते हैं, उनके लिए यह ज्ञान का साधन है; किन्तु वे ब्राह्मण (यदि वे स्वार्थवश इसका पालन करते हैं) मृत्यु के पश्चात् यहाँ से देवताओं के धाम स्वर्ग को जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.42.28 
येषां धर्मे च विस्पर्धा तेषां तज्ज्ञानसाधनम्।
ते ब्राह्मणा इतो मुक्ता: स्वर्गं यान्ति त्रिविष्टपम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जो लोग धर्म का पालन करने में प्रतिस्पर्धा करते हैं, उनके लिए यह ज्ञान का साधन है; किन्तु वे ब्राह्मण (यदि वे स्वार्थवश इसका पालन करते हैं) मृत्यु के पश्चात् यहाँ से देवताओं के धाम स्वर्ग को जाते हैं।
 
For those who compete in following the Dharma, it is a means of knowledge; but those Brahmins (if they perform it with a selfish motive) after death go from here to heaven, the abode of the gods. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)