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mahabharat 5.42.26: धृतराष्ट्र बोले - विद्वान्! पुण्य कर्म करने वाले द्विजातियों के मनुष्यों को अपने-अपने धर्म के फलस्वरूप जो सनातन लोक प्राप्त होते हैं, उनका क्रम बताइए तथा उनसे भिन्न अन्य लोकों का भी वर्णन कीजिए। अब मैं सकाम कर्म के विषय में जानना नहीं चाहता। 26॥   |   mahabharat अध्याय 5.42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.42.26 
धृतराष्ट्र उवाच
यानिहाहु: स्वस्य धर्मस्य लोकान्
द्विजातीनां पुण्यकृतां सनातनान्।
तेषां क्रमान् कथय ततोऽपि चान्यान्
नैतद् विद्वन् वेत्तुमिच्छामि कर्म॥ २६॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - विद्वान्! पुण्य कर्म करने वाले द्विजातियों के मनुष्यों को अपने-अपने धर्म के फलस्वरूप जो सनातन लोक प्राप्त होते हैं, उनका क्रम बताइए तथा उनसे भिन्न अन्य लोकों का भी वर्णन कीजिए। अब मैं सकाम कर्म के विषय में जानना नहीं चाहता। 26॥
 
Dhritarashtra said – Scholar! Tell the order of the eternal worlds that the people of the double castes who perform virtuous deeds have been told to attain as a result of their respective religions and also describe the other worlds apart from them. Now I don't want to know about the fruitive action. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)