Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.42.18: सनत्सुजात बोले - राजन ! इस प्रकार अज्ञानी पुरुष नाना लोकों में भ्रमण करता है और वेद भी कर्म के अनेक प्रयोजन बताते हैं; परंतु जो निष्काम पुरुष है, वह अन्य सब मार्गों का वध करके ज्ञानमार्ग से भगवान् का स्वरूप होकर ही भगवान् को प्राप्त होता है ॥18॥ | mahabharat अध्याय 5.42: सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके विविध प्रश्नोंका उत्तर । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सनत्सुजात उवाच
एवं ह्यविद्वानुपयाति तत्र
तत्रार्थजातं च वदन्ति वेदा:।
अनीह आयाति परं परात्मा
प्रयाति मार्गेण निहत्य मार्गान्॥ १८॥
अनुवाद
सनत्सुजात बोले - राजन ! इस प्रकार अज्ञानी पुरुष नाना लोकों में भ्रमण करता है और वेद भी कर्म के अनेक प्रयोजन बताते हैं; परंतु जो निष्काम पुरुष है, वह अन्य सब मार्गों का वध करके ज्ञानमार्ग से भगवान् का स्वरूप होकर ही भगवान् को प्राप्त होता है ॥18॥
Sanatsujata said – King! An ignorant person thus travels to different worlds and the Vedas also explain many purposes of action; But the person who is selfless, attains God only by becoming the embodiment of God, through the path of knowledge, by slaying all other paths. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥