vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 41: विदुरजीके द्वारा स्मरण करनेपर आये हुए सनत्सुजात ऋषिसे धृतराष्ट्रको उपदेश देनेके लिये उनकी प्रार्थना
»
श्लोक 7
श्लोक
5.41.7
धृतराष्ट्र उवाच
ब्रवीहि विदुर त्वं मे पुराणं तं सनातनम्।
कथमेतेन देहेन स्यादिहैव समागम:॥ ७॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - विदुर! उस परम प्राचीन सनातन ऋषि का पता मुझे बताओ। वह इस शरीर से यहाँ कैसे एक हो सकते हैं?॥ 7॥
Dhritarashtra said - Vidur! Tell me the address of that most ancient Sanatan Rishi. How can he be united with this body here itself?॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×