श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 41: विदुरजीके द्वारा स्मरण करनेपर आये हुए सनत्सुजात ऋषिसे धृतराष्ट्रको उपदेश देनेके लिये उनकी प्रार्थना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.41.7 
धृतराष्ट्र उवाच
ब्रवीहि विदुर त्वं मे पुराणं तं सनातनम्।
कथमेतेन देहेन स्यादिहैव समागम:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - विदुर! उस परम प्राचीन सनातन ऋषि का पता मुझे बताओ। वह इस शरीर से यहाँ कैसे एक हो सकते हैं?॥ 7॥
 
Dhritarashtra said - Vidur! Tell me the address of that most ancient Sanatan Rishi. How can he be united with this body here itself?॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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