श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 41: विदुरजीके द्वारा स्मरण करनेपर आये हुए सनत्सुजात ऋषिसे धृतराष्ट्रको उपदेश देनेके लिये उनकी प्रार्थना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.41.6 
ब्राह्मीं हि योनिमापन्न: सुगुह्यमपि यो वदेत्।
न तेन गर्ह्यो देवानां तस्मादेतद् ब्रवीमि ते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यदि ब्राह्मण योनि में जन्मा हुआ मनुष्य रहस्यों को बता दे, तो वह देवताओं की निंदा का पात्र नहीं बनता, इसलिए मैं तुम्हें यह बता रहा हूँ।
 
If a person who is born as a Brahmin explains the secrets, then he does not become worthy of condemnation of the gods. That is why I am telling you this. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)