श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 41: विदुरजीके द्वारा स्मरण करनेपर आये हुए सनत्सुजात ऋषिसे धृतराष्ट्रको उपदेश देनेके लिये उनकी प्रार्थना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.41.4 
धृतराष्ट्र उवाच
किं त्वं न वेद तद् भूयो यन्मे ब्रूयात् सनातन:।
त्वमेव विदुर ब्रूहि प्रज्ञाशेषोऽस्ति चेत् तव॥ ४॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "विदुर! क्या तुम उस सत्य को नहीं जानते जो सनातन ऋषि मुझे पुनः बताएँगे? यदि तुम्हारी बुद्धि कुछ काम की हो, तो तुम ही मुझे उपदेश दो।" ॥4॥
 
Dhritarashtra said, "Vidur! Do you not know the truth which the Sanatan Rishi will tell me again? If your wisdom is of any use, then you yourself should teach me." ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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