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mahabharat 5.41.3: महाराज! वे समस्त ज्ञानियों में श्रेष्ठ हैं। वे आपके हृदय में स्थित सभी व्यक्त और अप्रकट प्रश्नों का उत्तर देंगे।॥3॥   |   mahabharat अध्याय 5.41: विदुरजीके द्वारा स्मरण करनेपर आये हुए सनत्सुजात ऋषिसे धृतराष्ट्रको उपदेश देनेके लिये उनकी प्रार्थना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 41: विदुरजीके द्वारा स्मरण करनेपर आये हुए सनत्सुजात ऋषिसे धृतराष्ट्रको उपदेश देनेके लिये उनकी प्रार्थना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.41.3 
स ते गुह्यान् प्रकाशांश्च सर्वान् हृदयसंश्रयान्।
प्रवक्ष्यति महाराज सर्वबुद्धिमतां वर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वे समस्त ज्ञानियों में श्रेष्ठ हैं। वे आपके हृदय में स्थित सभी व्यक्त और अप्रकट प्रश्नों का उत्तर देंगे।॥3॥
 
Maharaj! He is the best among all wise men. He will answer all the expressed and unexpressed questions that are in your heart. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)