Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.41.11-12: इसे सुनकर यह राजा समस्त दुःखों से मुक्त हो जाएगा तथा लाभ-अलाभ, प्रिय-अप्रिय, बाल्य-मृत्यु, भय-अप्रिय, भूख-प्यास, मद-धन, चिन्ता-आलस्य, काम-क्रोध और अवनति-उन्नति- ये सब उसे कष्ट न दें। | mahabharat अध्याय 5.41: विदुरजीके द्वारा स्मरण करनेपर आये हुए सनत्सुजात ऋषिसे धृतराष्ट्रको उपदेश देनेके लिये उनकी प्रार्थना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसे सुनकर यह राजा समस्त दुःखों से मुक्त हो जाएगा तथा लाभ-अलाभ, प्रिय-अप्रिय, बाल्य-मृत्यु, भय-अप्रिय, भूख-प्यास, मद-धन, चिन्ता-आलस्य, काम-क्रोध और अवनति-उन्नति- ये सब उसे कष्ट न दें।
Hearing this, this king will be freed from all the sorrows and profit-loss, beloved-unpleasant, childhood-death, fear-unpleasant, hunger-thirst, intoxication-wealth, worry-laziness, lust-anger and decline-progress - all these should not hurt him.
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सनत्सुजातपर्वणि विदुरकृतसनत्सुजातप्रार्थने एकचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सनत्सुजातपर्वमें विदुरजीके द्वारा सनत्सुजातकी प्रार्थनाविषयक इकतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥