Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.40.8: आशा धैर्य को नष्ट कर देती है, यमराज समृद्धि को नष्ट कर देते हैं, क्रोध लक्ष्मी को नष्ट कर देता है, कृपणता यश को नष्ट कर देती है और असावधानी पशुओं को नष्ट कर देती है, परन्तु हे राजन! यदि अकेला ब्राह्मण भी क्रोध कर ले, तो वह सम्पूर्ण राष्ट्र का नाश कर सकता है॥8॥ | mahabharat अध्याय 5.40: धर्मकी महत्ताका प्रतिपादन तथा ब्राह्मण आदि चारों वर्णोंके धर्मका संक्षिप्त वर्णन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आशा धैर्य को नष्ट कर देती है, यमराज समृद्धि को नष्ट कर देते हैं, क्रोध लक्ष्मी को नष्ट कर देता है, कृपणता यश को नष्ट कर देती है और असावधानी पशुओं को नष्ट कर देती है, परन्तु हे राजन! यदि अकेला ब्राह्मण भी क्रोध कर ले, तो वह सम्पूर्ण राष्ट्र का नाश कर सकता है॥8॥
Hope destroys patience, Yamraj destroys prosperity, anger destroys Lakshmi, miserliness destroys fame and lack of care destroys animals, but O King! If a Brahmin alone becomes angry, he can destroy the entire nation. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥