Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.40.4: गुणों में दोष देखना मृत्यु के समान है, निन्दा करना लक्ष्मी का नाश करना है तथा सेवा का अभाव, जल्दबाजी और आत्मप्रशंसा - ये तीनों शिक्षा के शत्रु हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.40: धर्मकी महत्ताका प्रतिपादन तथा ब्राह्मण आदि चारों वर्णोंके धर्मका संक्षिप्त वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 40: धर्मकी महत्ताका प्रतिपादन तथा ब्राह्मण आदि चारों वर्णोंके धर्मका संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.40.4 
असूयैकपदं मृत्युरतिवाद: श्रियो वध:।
अशुश्रूषा त्वरा श्लाघा विद्याया: शत्रवस्त्रय:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
गुणों में दोष देखना मृत्यु के समान है, निन्दा करना लक्ष्मी का नाश करना है तथा सेवा का अभाव, जल्दबाजी और आत्मप्रशंसा - ये तीनों शिक्षा के शत्रु हैं।
 
Seeing faults in qualities is like death, criticizing is killing Goddess Lakshmi and lack of service, haste and self-praise - these three are the enemies of education.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)