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श्लोक  5.40.30 
धृतराष्ट्र उवाच
एवमेतद् यथा त्वं मामनुशाससि नित्यदा।
ममापि च मति: सौम्य भवत्येवं यथाऽऽत्थ माम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले- विदुर! आप जिस प्रकार मुझे प्रतिदिन उपदेश देते हैं, वह बहुत अच्छा है। सौम्य! आप जो कुछ मुझसे कहते हैं, मैं भी वैसा ही सोचता हूँ।
 
Dhritarashtra said- Vidur! The way you preach me every day is very good. Soumya! Whatever you say to me, I also think the same.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)