Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.40.27: यदि कोई वैश्य वेद-शास्त्रों का अध्ययन करके ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा उनके आश्रितों को समय-समय पर धन देकर उनकी सहायता करता है तथा यज्ञों की तीनों अग्नियों का पवित्र धूम्रपान करता रहता है, तो वह मृत्यु के पश्चात स्वर्गलोक में दिव्य आनंद भोगता है॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 5.40: धर्मकी महत्ताका प्रतिपादन तथा ब्राह्मण आदि चारों वर्णोंके धर्मका संक्षिप्त वर्णन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि कोई वैश्य वेद-शास्त्रों का अध्ययन करके ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा उनके आश्रितों को समय-समय पर धन देकर उनकी सहायता करता है तथा यज्ञों की तीनों अग्नियों का पवित्र धूम्रपान करता रहता है, तो वह मृत्यु के पश्चात स्वर्गलोक में दिव्य आनंद भोगता है॥ 27॥
If a Vaishya, after studying the Vedas and Shastras, helps Brahmins, Kshatriyas and their dependents by giving them money from time to time and keeps inhaling the holy smoke of the three fires of sacrifices, then after his death he enjoys transcendental bliss in the heavenly world.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥