Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.40.24: धैर्य के साथ लिंग और उदर की रक्षा करो, अर्थात् काम की उत्तेजना और क्षुधा की ज्वाला को धैर्य के साथ सहन करो। इसी प्रकार नेत्रों से हाथ और पैरों की, मन से नेत्र और कानों की तथा सत्कर्मों से मन और वाणी की रक्षा करो॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 5.40: धर्मकी महत्ताका प्रतिपादन तथा ब्राह्मण आदि चारों वर्णोंके धर्मका संक्षिप्त वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 40: धर्मकी महत्ताका प्रतिपादन तथा ब्राह्मण आदि चारों वर्णोंके धर्मका संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.40.24 
धृत्या शिश्नोदरं रक्षेत् पाणिपादं च चक्षुषा।
चक्षु:श्रोत्रे च मनसा मनो वाचं च कर्मणा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
धैर्य के साथ लिंग और उदर की रक्षा करो, अर्थात् काम की उत्तेजना और क्षुधा की ज्वाला को धैर्य के साथ सहन करो। इसी प्रकार नेत्रों से हाथ और पैरों की, मन से नेत्र और कानों की तथा सत्कर्मों से मन और वाणी की रक्षा करो॥ 24॥
 
Protect the penis and abdomen with patience, i.e., endure the passion of sex and the flames of hunger with patience. Similarly, protect the hands and feet with the eyes, the eyes and ears with the mind, and the mind and speech with good deeds.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)