Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.40.2: जो मनुष्य अधर्म से अर्जित बहुत से धन को बिना आसक्त हुए त्याग देता है, वह दुःखों से मुक्त हो जाता है और उसी प्रकार सुखपूर्वक सोता है, जैसे साँप अपनी पुरानी केंचुली को त्याग देता है ॥2॥ | mahabharat अध्याय 5.40: धर्मकी महत्ताका प्रतिपादन तथा ब्राह्मण आदि चारों वर्णोंके धर्मका संक्षिप्त वर्णन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य अधर्म से अर्जित बहुत से धन को बिना आसक्त हुए त्याग देता है, वह दुःखों से मुक्त हो जाता है और उसी प्रकार सुखपूर्वक सोता है, जैसे साँप अपनी पुरानी केंचुली को त्याग देता है ॥2॥
He who abandons a large sum of money earned through unrighteousness without being attracted to it, becomes free from sorrows and sleeps comfortably just as a snake sheds its old skin. ॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥