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mahabharat 5.40.10-11: भारत! मनुजी ने कहा है कि देवता, ब्राह्मण और अतिथियों की पूजा के लिए बकरा, बैल, चंदन, वीणा, दर्पण, शहद, घी, जल, ताम्रपात्र, शंख, शालिग्राम और गोरोचन - ये सब वस्तुएं घर में रखनी चाहिए॥10-11॥   |   mahabharat अध्याय 5.40: धर्मकी महत्ताका प्रतिपादन तथा ब्राह्मण आदि चारों वर्णोंके धर्मका संक्षिप्त वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 40: धर्मकी महत्ताका प्रतिपादन तथा ब्राह्मण आदि चारों वर्णोंके धर्मका संक्षिप्त वर्णन  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  5.40.10-11 
अजोक्षा चन्दनं वीणा आदर्शो मधुसर्पिषी।
विषमौदुम्बरं शङ्ख: स्वर्णनाभोऽथ रोचना॥ १०॥
गृहे स्थापयितव्यानि धन्यानि मनुरब्रवीत्।
देवब्राह्मणपूजार्थमतिथीनां च भारत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भारत! मनुजी ने कहा है कि देवता, ब्राह्मण और अतिथियों की पूजा के लिए बकरा, बैल, चंदन, वीणा, दर्पण, शहद, घी, जल, ताम्रपात्र, शंख, शालिग्राम और गोरोचन - ये सब वस्तुएं घर में रखनी चाहिए॥10-11॥
 
Bharat! Manuji has said that for the worship of God, Brahmins and guests, goat, bull, sandalwood, veena, mirror, honey, ghee, water, copper vessels, conch, Shaligram and gorochana - all these things should be kept at home.॥ 10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)