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mahabharat 5.4.6: पापी और मूर्ख मनुष्य धीरे बोलने वाले को बलहीन समझता है और जब कोई उसके साथ नम्रता से व्यवहार करता है, तो वह मानने लगता है कि उसने उसके धन पर विजय प्राप्त कर ली है ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.4: राजा द्रुपदकी सम्मति   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 4: राजा द्रुपदकी सम्मति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.4.6 
मृदुं वै मन्यते पापो भाषमाणमशक्तिकम्।
जितमर्थं विजानीयादबुधो मार्दवे सति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
पापी और मूर्ख मनुष्य धीरे बोलने वाले को बलहीन समझता है और जब कोई उसके साथ नम्रता से व्यवहार करता है, तो वह मानने लगता है कि उसने उसके धन पर विजय प्राप्त कर ली है ॥6॥
 
A sinful and foolish man considers a person speaking softly to be powerless, and when someone behaves gently with him, he starts believing that he has conquered his wealth. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)