Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.39.84: इस पृथ्वी पर जितने भी चावल, जौ, स्वर्ण, गौ और स्त्रियाँ हैं, वे सब एक पुरुष के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं (अर्थात् वे किसी को भी संतुष्ट नहीं कर सकते)। ऐसा विचार करने वाला पुरुष आसक्ति में नहीं पड़ता ॥84॥ | mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस पृथ्वी पर जितने भी चावल, जौ, स्वर्ण, गौ और स्त्रियाँ हैं, वे सब एक पुरुष के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं (अर्थात् वे किसी को भी संतुष्ट नहीं कर सकते)। ऐसा विचार करने वाला पुरुष आसक्ति में नहीं पड़ता ॥84॥
All the rice, barley, gold, cattle and women on this earth are not enough even for one man (i.e. they cannot satisfy anyone). A man who thinks like this does not fall into attachment. ॥ 84॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥