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mahabharat 5.39.83: जिनके पास हजार रुपये हैं वे भी जीवित हैं और जिनके पास सौ रुपये हैं वे भी जीवित हैं; इसलिए हे राजा धृतराष्ट्र! तुम्हें अधिक धन का लोभ त्याग देना चाहिए। यह सत्य नहीं है कि इससे भी जीवन नहीं चलेगा ॥ 83॥   |   mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.39.83 
सहस्रिणोऽपि जीवन्ति जीवन्ति शतिनस्तथा।
धृतराष्ट्र विमुञ्चेच्छां न कथञ्चिन्न जीव्यते॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
जिनके पास हजार रुपये हैं वे भी जीवित हैं और जिनके पास सौ रुपये हैं वे भी जीवित हैं; इसलिए हे राजा धृतराष्ट्र! तुम्हें अधिक धन का लोभ त्याग देना चाहिए। यह सत्य नहीं है कि इससे भी जीवन नहीं चलेगा ॥ 83॥
 
Those who have a thousand rupees are alive and those who have a hundred rupees are also alive; therefore, O King Dhritarashtra, you should give up the greed for more money. It is not true that life will not be sustained even by this. ॥ 83॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)