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mahabharat 5.39.82: जिसके मित्रों को धन देकर वश में किया गया है, जिसके शत्रुओं को युद्ध में जीता गया है और जिसकी स्त्रियों को भोजन-पानी देकर वश में किया गया है, उसका जीवन सफल है अर्थात् सुखों से पूर्ण है ॥ 82॥   |   mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  5.39.82 
यस्य दानजितं मित्रं शत्रवो युधि निर्जिता:।
अन्नपानजिता दारा: सफलं तस्य जीवितम्॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
जिसके मित्रों को धन देकर वश में किया गया है, जिसके शत्रुओं को युद्ध में जीता गया है और जिसकी स्त्रियों को भोजन-पानी देकर वश में किया गया है, उसका जीवन सफल है अर्थात् सुखों से पूर्ण है ॥ 82॥
 
The person whose friends have been subdued by giving wealth, whose enemies have been conquered in war and whose women have been tamed by giving food and drink, his life is successful i.e. full of happiness. ॥ 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)