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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश
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श्लोक 8
श्लोक
5.39.8
समृद्धा गुणत: केचिद् भवन्ति धनतोऽपरे।
धनवृद्धान् गुणैर्हीनान् धृतराष्ट्र विवर्जय॥ ८॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र! कुछ लोग गुणों से युक्त होते हैं और कुछ लोग धन से युक्त। जो धनवान तो हैं, परन्तु गुणों से रहित हैं, उनका सर्वथा त्याग कर देना चाहिए॥8॥
Dhritarashtra! Some people are blessed with virtues and some with wealth. Those who are rich but lack virtues should be completely abandoned. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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