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mahabharat 5.39.75: जो धन महान कष्ट सहकर, धर्म के नियमों का उल्लंघन करके या शत्रु के आगे झुककर प्राप्त किया गया हो, उस पर मन मत लगाओ ॥ 75॥   |   mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  5.39.75 
अतिक्लेशेन येऽर्था: स्युर्धर्मस्यातिक्रमेण वा।
अरेर्वा प्रणिपातेन मा स्म तेषु मन: कृथा:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
जो धन महान कष्ट सहकर, धर्म के नियमों का उल्लंघन करके या शत्रु के आगे झुककर प्राप्त किया गया हो, उस पर मन मत लगाओ ॥ 75॥
 
Do not set your mind on that wealth which is obtained by suffering great pain, by violating the rules of Dharma or by bowing down before the enemy. ॥ 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)