Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.39.7: महाराज! वास्तव में जिस क्षय से वृद्धि होती है, वह क्षय नहीं है; अपितु उस लाभ को भी क्षय ही समझना चाहिए, जिसे प्राप्त करने से अनेक लाभ नष्ट हो जाएँ॥7॥ | mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न स क्षयो महाराज य: क्षयो वृद्धिमावहेत्।
क्षय: स त्विह मन्तव्यो यं लब्ध्वा बहु नाशयेत्॥ ७॥
अनुवाद
महाराज! वास्तव में जिस क्षय से वृद्धि होती है, वह क्षय नहीं है; अपितु उस लाभ को भी क्षय ही समझना चाहिए, जिसे प्राप्त करने से अनेक लाभ नष्ट हो जाएँ॥7॥
Maharaj! In reality, the decay that causes growth is not decay; But that profit should also be considered as decay, getting which would destroy many benefits. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥