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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश
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श्लोक 68
श्लोक
5.39.68
उत्थानं संयमो दाक्ष्यमप्रमादो धृति: स्मृति:।
समीक्ष्य च समारम्भो विद्धि मूलं भवस्य तु॥ ६८॥
अनुवाद
उद्योग, संयम, कार्यकुशलता, सावधानी, धैर्य, स्मृति और सोच-समझकर कार्य आरम्भ करना - इन्हें प्रगति के मूल मन्त्र समझो ॥68॥
Industry, restraint, efficiency, caution, patience, memory and starting work after thinking - consider these as the basic mantras of progress. 68॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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