Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.39.64: लक्ष्मी न तो अधिक गुणों वाले लोगों के पास रहती हैं और न ही कम गुणों वाले लोगों के पास। वे न तो अधिक गुणों की इच्छा रखती हैं और न ही कम गुणों वाले लोगों के प्रति उनकी कोई आसक्ति होती है। पागल गाय की तरह यह अंधी लक्ष्मी कहीं-कहीं ही रहती है। 64। | mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लक्ष्मी न तो अधिक गुणों वाले लोगों के पास रहती हैं और न ही कम गुणों वाले लोगों के पास। वे न तो अधिक गुणों की इच्छा रखती हैं और न ही कम गुणों वाले लोगों के प्रति उनकी कोई आसक्ति होती है। पागल गाय की तरह यह अंधी लक्ष्मी कहीं-कहीं ही रहती है। 64।
Lakshmi neither stays with people with great virtues nor with people without many virtues. She neither wants many virtues nor has any attachment towards those without virtues. Like a mad cow, this blind Lakshmi stays at some places only. 64.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥