Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.39.55: मनुष्य मन, वाणी और कर्म से निरन्तर जिस कर्म में लगा रहता है, वही कर्म उसे अपनी ओर खींचता है। अतः मनुष्य को सदैव कल्याणकारी कर्म ही करने चाहिए ॥ 55॥ | mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य मन, वाणी और कर्म से निरन्तर जिस कर्म में लगा रहता है, वही कर्म उसे अपनी ओर खींचता है। अतः मनुष्य को सदैव कल्याणकारी कर्म ही करने चाहिए ॥ 55॥
Whatever a man continuously indulges in with his mind, speech and actions, that work pulls him towards itself. Therefore, one should always perform welfare activities. ॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥