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mahabharat 5.39.48: बुद्धिमान् पुरुष को चाहिए कि वह कुबुद्धि और तर्कशक्ति से रहित मनुष्य को घास से ढके हुए कुएँ के समान त्याग दे; क्योंकि उससे मित्रता नष्ट हो जाती है ॥ 48॥   |   mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.39.48 
दुर्बुद्धिमकृतप्रज्ञं छन्नं कूपं तृणैरिव।
विवर्जयीत मेधावी तस्मिन् मैत्री प्रणश्यति॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान् पुरुष को चाहिए कि वह कुबुद्धि और तर्कशक्ति से रहित मनुष्य को घास से ढके हुए कुएँ के समान त्याग दे; क्योंकि उससे मित्रता नष्ट हो जाती है ॥ 48॥
 
An intelligent person should abandon a person of bad intellect and lack of reasoning power, like a well covered with grass; because friendship with him gets destroyed. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)