श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.39.42 
अकीर्तिं विनयो हन्ति हन्त्यनर्थं पराक्रम:।
हन्ति नित्यं क्षमा क्रोधमाचारो हन्त्यलक्षणम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
विनम्रता बुरी प्रतिष्ठा को नष्ट करती है, वीरता दुर्भाग्य को दूर करती है, क्षमा सदैव क्रोध को नष्ट करती है और अच्छा आचरण बुरे आचरण को समाप्त कर देता है।
 
Humility destroys bad reputation, valour dispels misfortune, forgiveness always destroys anger and good behaviour puts an end to bad behaviour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)