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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश
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श्लोक 33
श्लोक
5.39.33
सुव्याहृतानि धीराणां फलत: परिचिन्त्य य:।
अध्यवस्यति कार्येषु चिरं यशसि तिष्ठति॥ ३३॥
अनुवाद
जो धैर्यवान पुरुषों के वचनों के परिणामों पर विचार करता है और फिर उन्हें आचरण में लाता है, वह दीर्घकाल तक यश का भागी बना रहता है ॥33॥
He who ponders over the consequences of the words of patient men and then puts them into action, remains a sharer of fame for a long time. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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