न कश्चिन्नापनयते पुमानन्यत्र भार्गवात्।
शेषसम्प्रतिपत्तिस्तु बुद्धिमत्स्वेव तिष्ठति॥ ३०॥
अनुवाद
शुक्राचार्य के अतिरिक्त ऐसा कोई दूसरा पुरुष नहीं है जो नीति का उल्लंघन न करता हो; अतः जो बीत गया सो बीत गया; शेष कर्तव्यों का विचार तो (आप जैसे) बुद्धिमान पुरुषों को ही करना है ॥30॥
Apart from Shukracharya, there is no other person who does not violate ethics; therefore, what is past is past; the consideration of the remaining duties is up to wise men (like you) only. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥