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mahabharat 5.39.17-18h: जो मनुष्य अपने सम्बन्धियों, गरीबों, दलितों और रोगियों पर दया करता है, उसके पुत्रों और पशुओं की वृद्धि होती है और वह शाश्वत कल्याण का अनुभव करता है।   |   mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.39.17-18h 
यो ज्ञातिमनुगृह्णाति दरिद्रं दीनमातुरम्॥ १७॥
स पुत्रपशुभिर्वृद्धिं श्रेयश्चानन्त्यमश्नुते।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपने सम्बन्धियों, गरीबों, दलितों और रोगियों पर दया करता है, उसके पुत्रों और पशुओं की वृद्धि होती है और वह शाश्वत कल्याण का अनुभव करता है।
 
He who is kind to his relatives, the poor, the downtrodden and the sick, receives growth in his sons and animals and experiences eternal well-being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)