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mahabharat 5.39.14-15h: उपर्युक्त दोषों के अतिरिक्त जिन लोगों में अन्य बड़े दोष हों, उनका त्याग कर देना चाहिए। सौहार्द नष्ट होने पर नीच लोगों का प्रेम नष्ट हो जाता है और उस सौहार्द से मिलने वाला सुख और सफलता भी नष्ट हो जाती है। ॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  5.39.14-15h 
युक्ताश्चान्यैर्महादोषैर्ये नरास्तान् विवर्जयेत्।
निवर्तमाने सौहार्दे प्रीतिर्नीचे प्रणश्यति॥ १४॥
या चैव फलनिर्वृत्ति: सौहृदे चैव यत् सुखम्।
 
 
अनुवाद
उपर्युक्त दोषों के अतिरिक्त जिन लोगों में अन्य बड़े दोष हों, उनका त्याग कर देना चाहिए। सौहार्द नष्ट होने पर नीच लोगों का प्रेम नष्ट हो जाता है और उस सौहार्द से मिलने वाला सुख और सफलता भी नष्ट हो जाती है। ॥14 1/2॥
 
Besides the above-mentioned faults, people who have other big faults should be abandoned. When cordiality is lost, the love of mean people is destroyed, and the happiness and success that comes from that cordiality is also destroyed. ॥ 14 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)