Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.39.1: धृतराष्ट्र बोले - विदुर ! यह मनुष्य धन कमाने या खोने में स्वतंत्र नहीं है। ब्रह्मा ने इसे डोरी से बँधी कठपुतली के समान भाग्य के अधीन कर दिया है; इसलिए तुम बोलते रहो, मैं सुनने के लिए धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर रहा हूँ॥ 1॥ | mahabharat अध्याय 5.39: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीका नीतियुक्त उपदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र बोले - विदुर ! यह मनुष्य धन कमाने या खोने में स्वतंत्र नहीं है। ब्रह्मा ने इसे डोरी से बँधी कठपुतली के समान भाग्य के अधीन कर दिया है; इसलिए तुम बोलते रहो, मैं सुनने के लिए धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर रहा हूँ॥ 1॥
Dhritarashtra said - Vidur! This man is not free to acquire or lose wealth. Brahma has made him subject to destiny like a puppet tied with a string; therefore you keep on speaking, I am waiting patiently to listen.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥